गुरुवार, 27 अगस्त 2020

घरेलु हिंसा के लिए प्रार्थना पत्र

दहेज़ व् घरेलु हिंसा के खिलाफ थाने में प्रार्थना पत्र

 शेवा में ,             

             श्री मान थाना अध्यक्ष 

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विषय - घरेलू हिंसा की संदर्भ में |

महोदय जी , मै -----------------पिता /पति ----------------पता -----------------------------------------------------|

मेरी शादी लगभग 1 वर्ष पहले ----------------------पिता ----------------------पता ---------------------------------

से हुयी थी  | जिसमे मेरे ससुराल पक्ष ने हमारे पिता जी से  काफी सारे गहने और घरेलु सामान जैसे बर्तन इत्यादि लिए| और साथ ही मेरे पिता जी से नगद  ----------रूपये भी लिए | हमारी शादी तारीख ---------को  सम्पन्न हुयी | और हम अपने मायके से  विदा होकर ससुराल आ गए | महोदय जी बताना चाहूंगी की कुछ दिन तक सब कुछ ठीक  रहा |लेकिन कुछ ही दिन बाद मुझसे फिर से अपने पिता जी से पैसे मागने और मंगाने  के लिए मेरे पति व् मेरी सास के  द्वारा बोला जाने लगा | जब मैंने कहा की शादी के समय जो देना था मेरे पिता जी ने दे दिया है | अब उनके पास पैसे नहीं हैं | और अब मै उनसे कुछ भी नहीं मांगूंगी | तो उन लोगो का ब्यवहार मेरे प्रति एकाएक  बदल गया | और उन लोगो ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया| मुझे अपने मायके से सम्पर्क रखने से मना कर दिया गया |और  बोला गया की अब अपने मायके बालो को भूल जाओ जब वो लोग तुम्हे पैसे नही दे सकते तो उनसे सम्पर्क रखने की आवश्यकता नही है | महोदय जी इस तरह की बात सुन कर जब हमने विरोध करने का प्रयास किया| तो मेरे पति व उनके घर वालो ने मुझे मारा| और  फिर बात बात पर मुझे मरना पीटना उन लोगो की आदत बन गयी| उन लोगो का कहना है |अपने पिता से पैसे  लाओ नहीं तो यहाँ  से अपने पिता के घर हमेशा के लिए चली जाओ | महोदय जी हम ये सब सहते रहे लेकिन हद तो तब हो गयी जब मुझे डंडे से मार मार कर अधमरा कर दिया  गया | तब मैंने हिम्मत करके अपने मायके बालो कोफोन कर  बुलाया | और वो लोग मुझे उस  दलदल से निकाल कर अपने साथ मेरे पिता जी घर ले आये | यहाँ आने के बाद मैंने अपने साथ हुए अन्याय का विरोध करने की हिम्मत जुटा  पाई | और कानून का सहारा लेने का मन बनाया   |

अतः महोदय  जी प्रार्थना करती हूँ की मेरे साथ  हुए अमानवीय कृत्य के लिए दोषी मेरे पति व् उनके घर बालो पर कठोर क़ानूनी कार्यवाही करने की कृपा करे आपकी बहोत आभारी रहूंगी | धन्यवाद 


दिनंक --                                                                                                                           प्रार्थनी 




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