- धार्मिक भावनाओ को आहत करना =
अधिकारों की लडाई के लिए जन साधारण को कानून की जानकारी होना आवश्यक है |
लेबल
रविवार, 30 अगस्त 2020
धार्मिक भावनाओं को आहत करना गंभीर अपराध है ! जाने IPC की धारा 295 (A) के बारे में
शनिवार, 29 अगस्त 2020
IPC की धारा 4, धारा 5
- IPC धारा 4-
- IPC धारा . 5
क्रास केस क्या है ? क्रास केस की शिकायत कैसे करें? अगर पुलिस क्रास केस न करें तो कोर्ट द्वारा कैसे किया जाए?
- क्रॉस केस क्या है?--
- क्रास केस की शिकायत कैसे करें ?
- अगर पोलिष क्रास केस न करें तो कोर्ट द्वारा क्रास केस कैसे किया जाए ?
- क्रास केस करने की समय सीमा क्या है ?-
शुक्रवार, 28 अगस्त 2020
IPC की धारा 1 , धारा 2, धारा 3,
आईपीसी की प्रथम धारा से इस ग्रंथ की शुरुआत होती है |जो इस प्रकार है|
- IPC की धारा .1-
- IPC धारा . 2-
- IPC धारा .3-
गुरुवार, 27 अगस्त 2020
भारतीय संविधान की विशेषताएं
भारतीय संविधान की विशेषताएं
मित्रों हमारे भारतीय संविधान की विशेषताओं के वजह से ही भारतीय संविधान दुनिया में अपनी एक नई पहचान और यह कह सकते हैं कि अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है भारतीय संविधान एक ऐसा संविधान है| जो विश्व में सबसे बड़ा संविधान कहा जाता है तो आइए हम और आप क्रमबद्ध देखते हैं कि भारतीय संविधान की क्या खूबियाँ ( विशेषताएं) हैं|- - लिखित एवं विस्तृत संविधान-
- संविधान की प्रस्तावना --
- सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य --
- लोकतंत्रात्मक गणराज्य-
- संसदीय सरकार-
- मूल अधिकार-
- राज्य के नीति निदेशक तत्व-
- एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका-
- संसदीय सर्वोच्चता और न्यायिक सर्वोच्चता का समन्वय-
- कठोर एवं लचीला संविधान-
- एकल नागरिकता -
- वयस्क मताधिकार-
- केंद्र उन्मुख संविधान-
- पंथनिरपेक्ष राज्य-
- समाजवादी राज्य-
- कर्तव्य मूल -
- अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा-
- विधि का शासन-
- अनेक देशों के संविधानिक तत्वों का समावेश-
- त्रिस्तरीय शासन /विकेंद्रीकृत व्यवस्था-
उम्मीद है आपको पसंद आया होगा कोई समस्या हो तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है |
घरेलु हिंसा के लिए प्रार्थना पत्र
दहेज़ व् घरेलु हिंसा के खिलाफ थाने में प्रार्थना पत्र
शेवा में ,
श्री मान थाना अध्यक्ष
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विषय - घरेलू हिंसा की संदर्भ में |
महोदय जी , मै -----------------पिता /पति ----------------पता -----------------------------------------------------|
मेरी शादी लगभग 1 वर्ष पहले ----------------------पिता ----------------------पता ---------------------------------
से हुयी थी | जिसमे मेरे ससुराल पक्ष ने हमारे पिता जी से काफी सारे गहने और घरेलु सामान जैसे बर्तन इत्यादि लिए| और साथ ही मेरे पिता जी से नगद ----------रूपये भी लिए | हमारी शादी तारीख ---------को सम्पन्न हुयी | और हम अपने मायके से विदा होकर ससुराल आ गए | महोदय जी बताना चाहूंगी की कुछ दिन तक सब कुछ ठीक रहा |लेकिन कुछ ही दिन बाद मुझसे फिर से अपने पिता जी से पैसे मागने और मंगाने के लिए मेरे पति व् मेरी सास के द्वारा बोला जाने लगा | जब मैंने कहा की शादी के समय जो देना था मेरे पिता जी ने दे दिया है | अब उनके पास पैसे नहीं हैं | और अब मै उनसे कुछ भी नहीं मांगूंगी | तो उन लोगो का ब्यवहार मेरे प्रति एकाएक बदल गया | और उन लोगो ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया| मुझे अपने मायके से सम्पर्क रखने से मना कर दिया गया |और बोला गया की अब अपने मायके बालो को भूल जाओ जब वो लोग तुम्हे पैसे नही दे सकते तो उनसे सम्पर्क रखने की आवश्यकता नही है | महोदय जी इस तरह की बात सुन कर जब हमने विरोध करने का प्रयास किया| तो मेरे पति व उनके घर वालो ने मुझे मारा| और फिर बात बात पर मुझे मरना पीटना उन लोगो की आदत बन गयी| उन लोगो का कहना है |अपने पिता से पैसे लाओ नहीं तो यहाँ से अपने पिता के घर हमेशा के लिए चली जाओ | महोदय जी हम ये सब सहते रहे लेकिन हद तो तब हो गयी जब मुझे डंडे से मार मार कर अधमरा कर दिया गया | तब मैंने हिम्मत करके अपने मायके बालो कोफोन कर बुलाया | और वो लोग मुझे उस दलदल से निकाल कर अपने साथ मेरे पिता जी घर ले आये | यहाँ आने के बाद मैंने अपने साथ हुए अन्याय का विरोध करने की हिम्मत जुटा पाई | और कानून का सहारा लेने का मन बनाया |
अतः महोदय जी प्रार्थना करती हूँ की मेरे साथ हुए अमानवीय कृत्य के लिए दोषी मेरे पति व् उनके घर बालो पर कठोर क़ानूनी कार्यवाही करने की कृपा करे आपकी बहोत आभारी रहूंगी | धन्यवाद
दिनंक -- प्रार्थनी
बुधवार, 26 अगस्त 2020
मार पीट के सम्बन्ध के लिए थाने में दिया जाने वाला प्रार्थना पत्र
शेवा में
श्री मान थाना अध्यक्ष
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विषय - झगडे के सम्बन्ध में |
महोदय जी , मै ---------------पिता -----------पता ------------------का मूल रूप से निवासी हूँ |
महोदय जी मेरे पड़ोस का ---------पिता ----------पता ---------------|जब मै अपने खेत से घर की तरफ जा रहा था| तो मुझे अनायास गाली देने लगा| और मुझे रस्ते पर रोक कर मुझसे जबरन हान्था पाई करने लगा |जब हमने बच कर निकलना चाहा तो मेरा हाँथ पकड कर मुझे जमीन पर गिरा दिया |और मेरे ऊपर बगल में पड़े इट से प्रहार करने लगा |उस प्रहार से हमे चोटे आई हम कुछ संभलते की वह एक लोहे की रोड अपने घर से निकाल लाया| और मेरे उपर रोड से प्रहार करने लगा| इस तरह लोहे की रोड के प्रहार से मुझे काफी शारीरिक चोटे आयीं |और रक्त भी निकलने लगा | मै उससे अपनी जान बक्श देने की भीख मांगने लगा |लेकिन उसने मेरी एक न सुनी मेरे उपर लगातार लोहे की रोड से प्रहार करता रहा| कुछ समय बाद मोहल्ले के लोगो के बिच बचाओ करने पर हमारी जान बची |
अतः महोदय जी से अनुरोध है| की दोषी के खिलफ कठोर क़ानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृप करे| प्रार्थी आपका आभारी रहेगा | धन्यवाद
दिनांक - प्रार्थी
मोबाइल खोने पर थाने में प्रार्थना पत्र
भारत का संबैधानिक विकास
भारतीय संविधान का निर्माण किसी निश्चित समय पर नही हुवा ,अपितु यह क्रमिक विकास का परिणाम है |
- भारत के संबैधानिक विकास के इतिहास को दो भागों में बिभक्त किया जा सकता है|
- ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन के अंतर्गत |
- ब्रिटेन की सरकार(क्राउन ) के शासन के अंतर्गत|
- भारत में ब्रिटिस 1600 ई .में ईस्ट इण्डिया कंपनी के रूप में ब्यापार करने आये |
- एलिजाबेथ प्रथम के चार्टर द्वारा इन्हें भारत में ब्यापार करने के अधिकार प्राप्त थे |भारत में ब्यापार करते -करते कम्पनी 1765 ई . में बंगाल ,विहार ,और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व एवं दीवानी न्याय के अधिकार )भी प्राप्त कर ली|
- ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन 1858 ई . तक रहा| उस समय तक ब्रिटेन की संसद कई कानून (आदेश पत्र )जरी करके कम्पनी के शासन पर नियंत्रण रखती रही |इन्ही कानून ने भारत की सम्बैधानीक विकास की पृष्ठभूमि तैयार की |
मंगलवार, 25 अगस्त 2020
दण्ड
कुछ प्रकार के मानव व्यवहार ऐसे होते हैं| जिसकी कानून इजाजत नहीं देता। ऐसे व्यवहार करने पर किसी व्यक्ति को उनके परिणामों का सामना करना पड़ता है। खराब व्यवहार को अपराध या गुनाह कहते हैं| और इसके परिणाम को दंड कहा जाता है। जिन व्यवहारों को अपराध माना जाता है |उनके बारे में और हर अपराध से संबंधित दंड के बारे में ब्योरा मुख्यतया आइपीसी में दिया गया है|
Crime (अपराध)
अपराध (crime) ----
- दंडाभियोग समाजविरोधी क्रिया है;|
- समाज द्वारा निर्धारित आचरण का उल्लंघन या उसकी अवहेलना दंडाभियोग है;|
- यह ऐसी क्रिया या क्रिया में त्रुटि है, जिसके लिये दोषी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित दंड दिया जाता है।अर्थात अपराध कानूनी नियमो कानूनों के उल्लंघन करने की नकारात्मक प्रक्रिया है जिससे समाज के तत्वों का विनाश होता है ।
दंड प्रक्रिया संहिता1973(code of criminal procedure 1973
दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है। यह सन् १९७३ में पारित हुआ तथा १ अप्रैल १९७४ से लागू हुआ। 'सीआरपीसी' दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम है। जब कोई अपराध किया जाता है तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं| जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है।
indian penal code 1860 (भारतीय दंड संहिता 1860)
भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी यह लागू होगा|
यह ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी अब भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) लागू है.|
भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर संशोधन होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन अन्य ब्रिटिश [उपनिवेश|उपनिवेशों] (बर्मा, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई आदि) में भी लागू की गयी थी। लेकिन इसमें अब तक बहुत से संशोधन किये जा चुके है। होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। ।
आशा है आपको पसंद आया होगा
प्रस्तावना (PREAMBLE
हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न,
समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय ,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा,
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए,
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0(मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी ,संवत दो हजार छह विक्रम ) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं |
सर अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर के अनुसार "संविधान की प्रस्तावना हमारे दीर्घकालिक सपनों का विचार है " बताता चलू की इन महोदय ने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

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