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शनिवार, 29 अगस्त 2020

IPC की धारा 4, धारा 5

 

  • IPC धारा  4- 

राज्य क्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार-

1- भारत से बाहर और किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा|

2- भारत में रजिस्ट्री कृत किसी पोतिया विमान पर चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी अपराध को भी लागू है|

3- कोई व्यक्ति किसी अस्थान में भारत से बाहर और पड़े कोई अपराध भारत में स्थित कंप्यूटर साधन को लक्ष्य बनाते हुए कार्य करता है|

आइए विस्तार से अपनी भाषा में समझते हैं|-

 शब्द अपराध संहिता  में ऐसा प्रत्येक अपराध सम्मिलित है| जो भारत से बाहर किया गया है | जो यदि भारत में किया जाता है | तो इस संहिता  के अंतर्गत दंडनीय होता है | तो ऐसे अपराधों को बाहर करने पर भी संहिता  सामान प्रावधान प्रदान करती है|

इसको उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं|

 का जो भारत का नागरिक है चीन में हत्या करता है अगर  वाह भारत के किसी स्थान पर पाया जाए तो जहां वह पाया जाए वहां हत्या के लिए विचारित और दोष सिद्ध किया जा सकता है|

  • IPC धारा . 5
-इस अधिनियम में कोईबात भारत सरकार की सेना के अफसरों, सैनिकों, को नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और  अभित्यजन जन को दंडित करने वाले किसी अधिनियम के उपबंध हो या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबंधों, पर प्रभाव नहीं डालेगी



शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

IPC की धारा 1 , धारा 2, धारा 3,

IPC की धारा 

आईपीसी के बारे में बात करते हुए | आज आईपीसी की प्रथम धारा का वर्णन करना आवश्यक हो गया है |जो अनावश्यक ही छुट  जाती है| और ना ही हम कभी इन छोटी धाराओं का जिक्र ही करते हैं | लेकिन अगर सोचा जाए| तो इस ग्रंथ रूपी किताब की यह छोटी धाराएं आधारशिला हैं जो | मुख्य रूप से इस संहिता की  अवधारणा को व्यक्त करती है | इनको समझना सभी के लिए आवश्यक है | परन्तु   हम उन सभी धाराओं को समझ लेते हैं| जो हमारे समाज में दंडात्मक  और  गंभीर मानी जाती है| और हम इन आधारभूत धाराओं को विस्मृत कर देते हैं| जबकि इन सभी धाराओं क  ज्ञान ही हमें  पूर्ण बनाता है | तो फिर आइए अब क्रमशः  इन धाराओं की चर्चा कर लेते हैं |

आईपीसी की प्रथम धारा से इस ग्रंथ की शुरुआत होती है |जो इस प्रकार है| 


  •  IPC की धारा .1-
 यह अधिनियम भारतीय दंड संहिता कहलाएगा |और इसका विस्तार संपूर्ण भारत में होगा|
 बता दूं कि धारा 370 हटने के बाद आईपीसी की सभी धाराएं जम्मू कश्मीर राज्य में भी लागू होने लगी हैं|
अतः इस धारा में  संहिता  का नाम और   प्रवर्तन के विस्तार बताए गए हैं|

  • IPC  धारा . 2-
ब्यक्तिक क्षेत्राधिकार- जहां किसी व्यक्ति द्वारा भारतीय सीमा के अंदर कोई अपराध किया जाता है| चाहे वह भारतीय नागरिक हो या विदेशी संहिता  वहां पर लागू होगी | क्योंकि जो व्यक्ति अपराध कारित  करता है| वह अपराध के प्रभाव को भारत की धरती पर उत्पन्न करता है | संहिता की धारा २  ऐसे मामलों से ही संबंधित है|
 हम कह सकते हैं कि व्यक्ति भारत के अंदर अपराध कार्य करेगा| चाहे वह किसी भी प्रांत का किसी भी देश का हो उसके ऊपर आईपीसी की धारा प्रभावी होगी|

  • IPC धारा .3- 

संहिता की धारा 3  बहू प्रदेशिक क्षेत्राधिकार से संबंधित है| भारतीय आपराधिक न्यायालय का क्षेत्राधिकार इसके नागरिकों पर भारत के भीतर तथा इसके बाहर भी है| साधारण रूप में किसी देश के न्यायालय को केवल अंतः प्रादेशिक क्षेत्राधिकार होता है| तथा इसकी विधियां उसकी सीमा के भीतर ही प्रवर्तित हो सकती हैं| क्योंकि कोई अपनी सीमा से दूसरे राज्य को अपना अधिकार लागू करने की सहमति नहीं दे सकता | परंतु अपवाद परिस्थितियों में वही प्रदेशिक प्रभाव रखने वाली विधियों को अधिनियमित किया जाता है |भारतीय संविधान के अनुच्छेद  245(2) निर्धारित करती है, कि संसद द्वारा निर्मित कोई भी कानून वही प्रदेश क्षेत्र अधिकार होने के कारण अवैधानिक नहीं समझा जाएगा| यह अनुच्छेद निर्धारित करता है ,कि यदि कोई कृत्य भारत में अपराध है और वही कृत्य भारत की सीमा से परे यदि घटित होता है | तो भी वह अपराध होगा|  धारा 3 में प्रयुक्त भारतीय विधि द्वारा शब्द का प्रयोग | इस धारा के प्रवर्तन को प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 ,तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 187  और 188 में वर्णित मामलों तक ही सीमित रखता है| अपराध किसी भी व्यक्ति ,जो आरोपित अपराध को करते समय भारतीय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में था |  द्वारा किया  जा सकता है| ऐसा व्यक्ति भारतीय नागरिक हो भी सकता है| और नहीं भी यदि कोई भारती किसी दूसरे देश में एक कार्य करता है |और वह कार्य उस देश की विधि के अनुसार अपराध नहीं है| किंतु भारतीय विधि के अनुसार अपराध है| तो उसे भारत में अभियोजन(मुकदमा) का सामना करना पड़ेगा|

आइए इसको उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं-

रवि एक भारतीय लड़का है उसने एक विदेशी  डेविड को कुछ काम करने के लिए ₹10000 का चेक प्रदान किया  है| डेविड रवि को धोखा देकर अपने देश चला जाता है| तो रवि इस मामले को न्यायालय में अभियोजन कर सकता है चाहे वह व्यक्ति भारत में या भारत के परे का व्यक्ति ह


मंगलवार, 25 अगस्त 2020

indian penal code 1860 (भारतीय दंड संहिता 1860)

 भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी यह  लागू  होगा|

यह ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी अब भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) लागू है.|

भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर संशोधन होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन अन्य ब्रिटिश [उपनिवेश|उपनिवेशों] (बर्माश्रीलंकामलेशियासिंगापुरब्रुनेई आदि) में भी लागू की गयी थी। लेकिन इसमें अब तक बहुत से संशोधन किये जा चुके है। होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। ।

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