भारतीय संविधान की विशेषताएं
मित्रों हमारे भारतीय संविधान की विशेषताओं के वजह से ही भारतीय संविधान दुनिया में अपनी एक नई पहचान और यह कह सकते हैं कि अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है भारतीय संविधान एक ऐसा संविधान है| जो विश्व में सबसे बड़ा संविधान कहा जाता है तो आइए हम और आप क्रमबद्ध देखते हैं कि भारतीय संविधान की क्या खूबियाँ ( विशेषताएं) हैं|- - लिखित एवं विस्तृत संविधान-
1-भारतीय संविधान संविधान सभा के द्वारा निर्माण किया हुआ एवं लिखित संविधान है इस नजरिए से भारतीय संविधान अमेरिकी संविधान के समतुल्य है|
2- मूल संविधान में एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद ,22 भाग और 18 अनुसूचियां थी वर्तमान में इनमें एक प्रस्तावना 465 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं|
3-जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत संविधान है |
- संविधान की प्रस्तावना --
भारतीय संविधान का प्रारंभ एक प्रभावशाली प्रस्तावना से होता है जिसमें जनता की भावनाएं और आकांक्षाएं छोटे रूप में समाविष्ट हैं संविधान की प्रस्तावना संविधान निर्माताओं के विचारों का व्याख्यान भी करती है |
- सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य --
1 -संप्रभुता संपन्न राज्य उसे कहते हैं जो बाहरी नियंत्रण से सर्वथा मुक्त हो और अपनी आंतरिक तथा बैदेशिक नीतियों को स्वयं निर्धारित करता हो इस मामले में भारत पूर्णतः स्वतन्त्र है ।
2-भारत की संप्रभुता किसी विदेशी सत्ता में नही बल्कि भारत की जनता में ही निहित है|
मित्रों बता दूं कि भारत आज भी राष्ट्रमंडल (commonwealth)और संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O) का एक सदस्य है ,लेकिन यह सदस्यता भारत की अपनी इच्छा से है |
- लोकतंत्रात्मक गणराज्य-
1-भारत में प्रतिनिधि मूलक प्रजातंत्र की स्थापना की गई है अर्थात भारत का शासन भारतीय जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि ही संचालित करते हैं
2--गणराज्य(Republic)-गणराज्य से आशय है कि राज्य के सभी नागरिकों को अपनी योग्यता अनुसार सभी छोटे, बड़े पदों पर पहुंचने का अधिकार हो| एवं साथ ही भारतीय गणराज्य का प्रमुख( राष्ट्रपति) एक निर्वाचित व्यक्ति हो| ना कि ब्रिटेन की तरह अनुवांशिक व्यक्ति|
- संसदीय सरकार-
1- संविधान में संसदीय प्रणाली के शासन का प्रावधान ह| इस प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका शक्ति जनता के निर्वाचन प्रतिनिधियों में नहीं होती है| मंत्रिपरिषद का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है यह सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदाई होती है |
2- संविधान के अनुसार समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति के हाथों में निहित है किंतु राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं अर्थात मित्रों कर सकते हैं की भारतीय राष्ट्रपति के हाथ बने हुए होते हैं|
- मूल अधिकार-
1-अमेरिकी संविधान से प्रेरणा लेकर भारतीय संविधान के भाग 3 में नागरिकों को मूल अधिकार प्रदान किए गए हैं| मित्रों हम कह सकते हैं कि मूल अधिकार संविधान की एक मुख्य विशेषता है|
- राज्य के नीति निदेशक तत्व-
1- आयरलैंड के संविधान से प्रेरणा लेकर भारतीय संविधान के भाग 4 में कुछ ऐसे निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है जिसका पालन करना राज्य का कर्तव्य है |निदेशक तत्वों के माध्यम से देश में कल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रावधान किया गया है|
नोट => ग्रेनविल आँस्टीन के अनुसार नीति निर्देशक तत्व और अधिकार संविधान की आत्मा है मित्रों
- एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका-
1-- भारत का संविधान एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना करता है भारतीय न्यायपालिका में शीर्ष स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय है राज्य में उच्च न्यायालय एवं नीचे क्रमशा अधीनस्थ न्यायालय हैं|
2- सर्वोच्च न्यायालय संघीय अदालत है जो संविधान एवं मौलिक अधिकारों की संरक्षक है इसलिए संविधान में
न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं|
3- न्यायपालिका को स्वतंत्र रखने के लिए जजों की नियुक्ति वेतन, भत्ता तथा पद से हटाने के संबंध में संविधान में ही स्पष्ट प्रावधान कर दिए गए हैं जिससे मित्रों कोई भी सरकार न्यायाधीशों पर दबाव ना बना सके|
- संसदीय सर्वोच्चता और न्यायिक सर्वोच्चता का समन्वय-
भारतीय संविधान में संसदीय सर्वोच्चता और न्यायपालिका की सर्वोच्चता के बीच एक अद्भुत समन्वय है
यानी कि भारतीय संसद इंग्लैंड की संसद की तरह सर्वोच्च नहीं है और ना ही अमेरिका की न्यायपालिका की तरह भारतीय न्यायपालिका को असीमित शक्तियां प्राप्त हैं यही भारतीय संविधान की खूबसूरती और जटिलता भी हैमित्रों|
- कठोर एवं लचीला संविधान-
आप सोच रहे होंगे कठोर भी और लचीला भी आइए देखते हैं कैसे-
1-यह कठोर इसलिए है कि इसके कुछ प्रावधानों में संशोधन करना अत्यंत कठिन है |और इसके लिए विशेष प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है जबकि अधिकांश प्रावधानों को संसद द्वारा बहुमत से संशोधित किया जाता है| जो कि संविधान के लचीलापन को दर्शाता है|
2-- हमारे संविधान में कुछ ऐसे संशोधन हुए हैं| मित्रों जिसके फलस्वरूप तात्विक दृष्टि से संविधान की दोबारा रचना हो गई है | इनमें विशेष उल्लेखनीय हैं जैसे 7 वं,42 वा ,73वां और 74 व संविधान संशोधन तथा अंतिम 2 संशोधनों में क्रमशः भाग 9 और 9(क) जोड़े गए जो पंचायत और न्यायपालिका से संबंधित है | इस प्रकार एक तीसरे स्तर के शासन के बारे में उपबन्ध किया गया जो किसी अन्य देश के किसी संविधान में नहीं मिलता है|
- एकल नागरिकता -
1- संघात्मक संविधान में साधारण रूप से दोहरी नागरिकता होती है| जैसे अमेरिकी संविधान में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है लेकिन भारतीय संविधान केवल एक नागरिकता को मान्यता प्रदान करता है जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं| कि भारत का किसी भी राज्य के व्यक्ति को भारत की ही नागरिकता प्राप्त होती है | अलग-अलग राज्यों की नागरिकता प्रदान नहीं की जाती है| इससे देश की अखंडता को भी बल मिलता है|
अगर दूसरी तरफ से समझें तो भारत का प्रत्येक नागरिक केवल भारत का नागरिक है ना की किसी प्रांत का जिसमें वह रहता है| अर्थात भारत के किसी भी प्रांत का नागरिक भारत का ही नागरिक होता है|
- वयस्क मताधिकार-
भारत में संसदीय शासन प्रणाली की व्यवस्था है| जिसमें देश का प्रशासन जनता को प्रतिनिधियों के निर्वाचन का अधिकार देता है | अतः संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार भी प्रदान करता है |क्योंकि संविधान के लागू होने के समय से ही वयस्कों को 21 वर्ष की आयु पूरा करने के बाद मत देने का अधिकार प्राप्त था | परंतु 61 वें संविधान संशोधन (1989) में इस आयु सीमा को घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया|
अब हमारे देश के युवा 18 वर्ष पूरा करते ही अपना नेता चुनने के अधिकारी हो गए हैं|
- केंद्र उन्मुख संविधान-
यहां भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है| कि संघात्मक होते हुए भी इसमें केंद्रीकरण की प्रबल प्रवित्ति है| आपातकालीन परिस्थितियों में संविधान पूर्णता एकात्मक स्वरूप धारण कर लेता है|
- पंथनिरपेक्ष राज्य-
1 -भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है| इसलिए संविधान किसी भी धर्म विशेष को भारत राष्ट्र के धर्म के तौर पर मान्यता नहीं देता है|
2- भारतीय संविधान में सभी नागरिकों को धर्म, विश्वास, और उपासना की स्वतंत्रता दी गई है| किंतु अन्य संस्थाओं की तरह धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सार्वजनिक व्यवस्था सदाचार और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए युक्तियुक्त रोक लगाई जा सकती|
हमारे संविधान की यही सुंदरता है| मित्रों वह यह है |कि भारत के सभी धर्मों के आदर के साथ धर्मनिरपेक्षता के सकारात्मक पहलुओं को शामिल किया गया है|
- समाजवादी राज्य-
समाजवादी राज्य की स्थापना संविधान का मुख्य उद्देश्य है| जिस के संकेत प्रस्तावना में वर्णित सभी नागरिकों को आर्थिक न्याय प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता दिलाने के संकल्प में मिलता है|
समाजवादी शब्द संविधान में 42वां संशोधन द्वारा वर्ष 1976 में जोड़ा गया| मित्रों समाजवाद लोकतांत्रिक विचारधारा पर आधारित है| जिसका उद्देश्य विभिन्न वर्गों में असमानता समाप्त करके आर्थिक एवं सामाजिक शोषण को समाप्त करना है|
- कर्तव्य मूल -
मित्रो संविधान में नागरिकों को अधिकार तो प्रदान किए गए थे| मगर कर्तव्य का वर्णन नहीं किया गया था| भारत के नागरिकों के अपने राष्ट्र के प्रति कुछ कर्तव्य भी होने अनिवार्य थे अतः 42 वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में एक नया भाग 4 (क) एवं अनुच्छेद 51 (क) जोड़कर नागरिकों के मूल कर्तव्य को शामिल कर लिया गया|
- अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा-
भारतीय संविधान इस अर्थ में भी विशिष्ट है| कि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के हितों को सुरक्षा प्रदान की गई है| इसके लिए मूल अधिकारों की सूची में धार्मिक स्वतंत्रता सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार दिए गए हैं|
- विधि का शासन-
विधि के शासन से तात्पर्य है| मित्रों संसद द्वारा बनाए गए नियमों का पालन होना |इसी क्रम में भारतीय संविधान विधि के शासन की स्थापना करता है | इसके अंतर्गत विधि के समक्ष सभी नागरिक समान हैं |
तथा राज्य के सभी अंग एवं प्राधिकारी विधि द्वारा नियमित एवं नियंत्रित है|
- अनेक देशों के संविधानिक तत्वों का समावेश-
भारतीय संविधान की विशेषता का एक यह भी कारण है| जिसमें विभिन्न देशों के संविधान में निहित महत्वपूर्ण तत्वों का समावेश किया गया है| विदेशी संविधानो के अनुबंधों को भारतीय वातावरण के अनुसार ढाल कर संविधान में शामिल किया गया है|
- त्रिस्तरीय शासन /विकेंद्रीकृत व्यवस्था-
शासन संचालन में सुगमता व पारदर्शिता हेतु 73 वे एवं 74 वें संविधान संशोधन के माध्यम से स्थानीय स्वशासन का उपबंध किया गया है| इस प्रकार केंद्र राज्य एवं स्थानीय स्तर पर त्रि स्तरीय शासन व्यवस्था का उपबंध किया गया है |जो विश्व के अन्य संविधान में नहीं
है |
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