बुधवार, 26 अगस्त 2020

भारत का संबैधानिक विकास

भारतीय संविधान का निर्माण किसी निश्चित समय पर नही हुवा ,अपितु यह क्रमिक विकास का परिणाम है |

 

  •  भारत  के संबैधानिक विकास के इतिहास को दो भागों में बिभक्त किया जा सकता है| 

  1.  ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन के अंतर्गत |
  2. ब्रिटेन की सरकार(क्राउन ) के शासन के अंतर्गत|
 

  • भारत में ब्रिटिस 1600 ई .में ईस्ट इण्डिया कंपनी के रूप में ब्यापार करने आये |
  • एलिजाबेथ प्रथम के  चार्टर द्वारा इन्हें भारत में ब्यापार करने के अधिकार प्राप्त थे |भारत में ब्यापार करते -करते कम्पनी 1765 ई . में बंगाल ,विहार ,और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व एवं दीवानी न्याय के अधिकार )भी  प्राप्त कर ली|
 जिसके बाद कम्पनी की क्षेत्रीय शक्ति बनने  की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी |
  •  ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन 1858 ई . तक रहा| उस समय तक ब्रिटेन की संसद कई कानून (आदेश पत्र )जरी करके कम्पनी के शासन पर नियंत्रण रखती रही |इन्ही कानून ने भारत की सम्बैधानीक  विकास की पृष्ठभूमि तैयार की |
  • 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट (Regulating act -1773)--
  1. 1773ई .के रेगुलेटिंग एक्ट से भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी पर संसदी नियन्त्रण स्थापित करने का प्रयास किया गया | तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमन्त्री लार्ड नार्थ द्वारा गठित  गुप्त समिति की सिफारिश पर १७७३ ई .में पारित एक्ट को रेगुलेटिंग एक्ट 1773  कहा गया |
  2. इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश सरकार  ने ये बात साफ कर  दिया | की भारत में कम्पनी के अधिकार वाला क्षेत्र कम्पनी के ब्यापारियों का निजी मामला नही है |संसद को इस संदर्भ में आवश्यक कानून बनाने एवं निर्देश देने का पूरा अधिकार है |
  3. बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल इसी अधिनियम द्वारा कहा जाने लगा| तथा उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कारकारी परिषद का गठन किया गया | इस तरह से मद्रास एवं बम्बई के गवर्नर ,बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन हो गए | जबकि पहले सभी प्रेसिडेंसियों के गवर्नर एक दुसरे से अलग थे| 
  4. 1774 ई .में इस अधिनियम के अंतर्गत एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गयी | जिसमें मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य  न्यायाधीश थे |इस उच्चतम न्यायालय के प्रथम न्यायधीश के पद पर  सर एलिजा इम्पे नियुक्त हुए थे | 
  5. इस  अधिनियम के तहत कम्पनी की कर्मचारियों को निजी ब्यापार करने और हिन्दुस्तानियों से उपहार व् रिश्वत लेना प्रतिबंधित कर  दिया गया| तथा इस अधिनियम के द्वारा ,ब्रिटिश सरकार का कोर्ट आफ डायरेक्टर्स  के माध्यम से कम्पनी पर नियंत्रण सशक्त हो गया |अब कम्पनी को राजस्व ,नागरिको ,और सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सर्कार को देना आवश्यक हो गया |
आशा है आप को रेगुलेटिंग एक्ट ठीक तरीके से समझ आ गया होगा |आगे  इसी पेज पर हम  पिट्स इण्डिया एक्ट को जानेंगे 

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