IPC की धारा
आईपीसी की प्रथम धारा से इस ग्रंथ की शुरुआत होती है |जो इस प्रकार है|
- IPC की धारा .1-
यह अधिनियम भारतीय दंड संहिता कहलाएगा |और इसका विस्तार संपूर्ण भारत में होगा|
बता दूं कि धारा 370 हटने के बाद आईपीसी की सभी धाराएं जम्मू कश्मीर राज्य में भी लागू होने लगी हैं|
अतः इस धारा में संहिता का नाम और प्रवर्तन के विस्तार बताए गए हैं|
- IPC धारा . 2-
हम कह सकते हैं कि व्यक्ति भारत के अंदर अपराध कार्य करेगा| चाहे वह किसी भी प्रांत का किसी भी देश का हो उसके ऊपर आईपीसी की धारा प्रभावी होगी|
- IPC धारा .3-
संहिता की धारा 3 बहू प्रदेशिक क्षेत्राधिकार से संबंधित है| भारतीय आपराधिक न्यायालय का क्षेत्राधिकार इसके नागरिकों पर भारत के भीतर तथा इसके बाहर भी है| साधारण रूप में किसी देश के न्यायालय को केवल अंतः प्रादेशिक क्षेत्राधिकार होता है| तथा इसकी विधियां उसकी सीमा के भीतर ही प्रवर्तित हो सकती हैं| क्योंकि कोई अपनी सीमा से दूसरे राज्य को अपना अधिकार लागू करने की सहमति नहीं दे सकता | परंतु अपवाद परिस्थितियों में वही प्रदेशिक प्रभाव रखने वाली विधियों को अधिनियमित किया जाता है |भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245(2) निर्धारित करती है, कि संसद द्वारा निर्मित कोई भी कानून वही प्रदेश क्षेत्र अधिकार होने के कारण अवैधानिक नहीं समझा जाएगा| यह अनुच्छेद निर्धारित करता है ,कि यदि कोई कृत्य भारत में अपराध है और वही कृत्य भारत की सीमा से परे यदि घटित होता है | तो भी वह अपराध होगा| धारा 3 में प्रयुक्त भारतीय विधि द्वारा शब्द का प्रयोग | इस धारा के प्रवर्तन को प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 ,तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 187 और 188 में वर्णित मामलों तक ही सीमित रखता है| अपराध किसी भी व्यक्ति ,जो आरोपित अपराध को करते समय भारतीय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में था | द्वारा किया जा सकता है| ऐसा व्यक्ति भारतीय नागरिक हो भी सकता है| और नहीं भी यदि कोई भारती किसी दूसरे देश में एक कार्य करता है |और वह कार्य उस देश की विधि के अनुसार अपराध नहीं है| किंतु भारतीय विधि के अनुसार अपराध है| तो उसे भारत में अभियोजन(मुकदमा) का सामना करना पड़ेगा|
आइए इसको उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं-
रवि एक भारतीय लड़का है उसने एक विदेशी डेविड को कुछ काम करने के लिए ₹10000 का चेक प्रदान किया है| डेविड रवि को धोखा देकर अपने देश चला जाता है| तो रवि इस मामले को न्यायालय में अभियोजन कर सकता है चाहे वह व्यक्ति भारत में या भारत के परे का व्यक्ति ह
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