बुधवार, 26 अगस्त 2020

मार पीट के सम्बन्ध के लिए थाने में दिया जाने वाला प्रार्थना पत्र

 शेवा में 

            श्री मान थाना अध्यक्ष 

         --------------------------

विषय - झगडे के सम्बन्ध में |

महोदय जी , मै ---------------पिता -----------पता ------------------का मूल रूप से निवासी हूँ |

महोदय जी मेरे पड़ोस का ---------पिता ----------पता ---------------|जब मै अपने खेत से घर की तरफ जा रहा था| तो मुझे अनायास गाली देने लगा| और मुझे रस्ते पर रोक कर मुझसे जबरन हान्था  पाई करने लगा |जब हमने बच कर निकलना चाहा तो मेरा हाँथ पकड कर मुझे जमीन पर गिरा दिया |और मेरे ऊपर बगल में पड़े इट से प्रहार करने लगा |उस प्रहार से हमे चोटे  आई हम कुछ संभलते की  वह एक लोहे की रोड अपने घर से निकाल लाया| और मेरे उपर रोड से प्रहार करने लगा| इस तरह लोहे की रोड के  प्रहार से  मुझे काफी शारीरिक चोटे आयीं |और रक्त भी निकलने लगा | मै उससे  अपनी जान बक्श देने की भीख मांगने लगा |लेकिन उसने मेरी एक न सुनी मेरे उपर लगातार लोहे की रोड से प्रहार करता रहा|   कुछ समय बाद मोहल्ले के लोगो के बिच बचाओ करने पर हमारी जान बची |

अतः महोदय जी से अनुरोध है| की  दोषी के खिलफ कठोर क़ानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृप करे| प्रार्थी आपका आभारी रहेगा | धन्यवाद   


दिनांक -                                                                                                                               प्रार्थी 


मोबाइल खोने पर थाने में प्रार्थना पत्र

       सेवा में ,
 श्रीमान थाना अध्यक्ष
 ------------------------

विषय--   मोबाइल फोन खो जाने के सम्बन्ध में 

 महोदय जी, मैं ------     पिता-----    ग्राम चरवा चायल कौशांबी का मूल रूप से निवासी हूं |महोदय जी कल साम तकरीबन 5 बजे  मै  अपने मार्केट में सब्जी खरीदने गया था |जहां पर अनजाने में हमारा मोबाइल जो की _______ कम्कपनी  था |जिसकी imi नम्बर ______ थ | और जिसका मोबाइल नंबर-------- --- था | मोबाइल में  जो सिम लगी हुई थी वह _______ कंपनी की थी कहीं गिर गया|  और बाद में उसे ढूंढने पर मोबाइल मुझे नहीं मिला |
महोदय जी उस मोबाइल में मेरा कांटेक्ट नंबर मेरे संपर्क  के लोगों का मोबाइल नंबर ईमेल एड्रेस सेव थे| और अन्य मत्वपूर्ण जानकारी भी सेब थी | अतः महोदय जी से प्रार्थना करता हूं| कि मुझे मेरा मोबाइल ढूंढने में मेरी मदद करें| ताकि मेरे कांटेक्ट नंबर का कोई गलत इस्तेमाल न करने   पाए |और हमे     हमारा मोबाइल सुरक्षित मिल जाये |
 आपकी महान  कृपा होगी |  धन्यवाद 


     दिनांक-                                                                                                                             प्रार्थी
                                                                                                                                 
                                                                                                                                नाम -
                                                                                                                           मोबाइल नंबर -

भारत का संबैधानिक विकास

भारतीय संविधान का निर्माण किसी निश्चित समय पर नही हुवा ,अपितु यह क्रमिक विकास का परिणाम है |

 

  •  भारत  के संबैधानिक विकास के इतिहास को दो भागों में बिभक्त किया जा सकता है| 

  1.  ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन के अंतर्गत |
  2. ब्रिटेन की सरकार(क्राउन ) के शासन के अंतर्गत|
 

  • भारत में ब्रिटिस 1600 ई .में ईस्ट इण्डिया कंपनी के रूप में ब्यापार करने आये |
  • एलिजाबेथ प्रथम के  चार्टर द्वारा इन्हें भारत में ब्यापार करने के अधिकार प्राप्त थे |भारत में ब्यापार करते -करते कम्पनी 1765 ई . में बंगाल ,विहार ,और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व एवं दीवानी न्याय के अधिकार )भी  प्राप्त कर ली|
 जिसके बाद कम्पनी की क्षेत्रीय शक्ति बनने  की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी |
  •  ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन 1858 ई . तक रहा| उस समय तक ब्रिटेन की संसद कई कानून (आदेश पत्र )जरी करके कम्पनी के शासन पर नियंत्रण रखती रही |इन्ही कानून ने भारत की सम्बैधानीक  विकास की पृष्ठभूमि तैयार की |

मंगलवार, 25 अगस्त 2020

दण्ड

 कुछ प्रकार के मानव व्यवहार ऐसे होते हैं| जिसकी कानून इजाजत नहीं देता। ऐसे व्यवहार करने पर किसी व्यक्ति को उनके परिणामों का सामना करना पड़ता है। खराब व्यवहार को अपराध या गुनाह कहते हैं| और इसके परिणाम को दंड कहा जाता है। जिन व्यवहारों को अपराध माना जाता है |उनके बारे में और हर अपराध से संबंधित दंड के बारे में ब्योरा मुख्यतया आइपीसी में दिया गया है|

Crime (अपराध)

 अपराध  (crime) ----

  • दंडाभियोग समाजविरोधी क्रिया है;|
  • समाज द्वारा निर्धारित आचरण का उल्लंघन या उसकी अवहेलना दंडाभियोग है;|
  • यह ऐसी क्रिया या क्रिया में त्रुटि है, जिसके लिये दोषी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित दंड दिया जाता है।अर्थात अपराध कानूनी नियमो कानूनों के उल्लंघन करने की नकारात्मक प्रक्रिया है जिससे समाज के तत्वों का विनाश होता है ।

 अर्थात कहा जा सकता है| कि अपराध हर वह विषय वस्तु है| जिसके द्वारा सामाजिक दायित्वों का उल्लंघन किया जाए|
 अक्शर  लोग सोचते हैं | कि अपराध केवल हत्या डकैती अपहरण लूट बलात्कार को ही कहते हैं| स्पष्ट करता चलूं कि अगर आप मोटरसाइकिल से चलते हैं |और  सिग्नल तोड़ते हैं|तो वह भी अपराध की श्रेणी में आता है |लेकिन अगर आप मोटरसाइकिल चलाते समय किसी व्यक्ति से एक्सीडेंट कर देते हैं | तो वह अपराध की श्रेणी में इसलिए नहीं आता है| क्योंकि आपने जानबूझकर एक्सीडेंट नहीं किया है|

आशा है आपको पसंद आया होगा

दंड प्रक्रिया संहिता1973(code of criminal procedure 1973

 दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है। यह सन् १९७३ में पारित हुआ तथा १ अप्रैल १९७४ से लागू हुआ। 'सीआरपीसी' दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम है। जब कोई अपराध किया जाता है तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं| जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है। 

जब कोई अपराध किया जाता है| तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं| जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है। एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है। सीआरपीसी में इन दोनों प्रकार की प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है।दंड प्रक्रिया संहिता के द्वारा ही अपराधी को दंड दिया जाता है !

indian penal code 1860 (भारतीय दंड संहिता 1860)

 भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी यह  लागू  होगा|

यह ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) भारत के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा व दण्ड का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता भारत की सेना पर लागू नहीं होती। अनुच्छेद ३७० हटने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में भी अब भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) लागू है.|

भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् 1862 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर संशोधन होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन अन्य ब्रिटिश [उपनिवेश|उपनिवेशों] (बर्माश्रीलंकामलेशियासिंगापुरब्रुनेई आदि) में भी लागू की गयी थी। लेकिन इसमें अब तक बहुत से संशोधन किये जा चुके है। होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। ।

आशा है आपको पसंद आया होगा


न्यायालय की अवमानना के दोषी सिद्ध हुए प्रशान्त भूषण हुवा एक रुपया का जुर्माना | जाने क्या है न्यायालय की अवमानना ? आपको भी ध्यान रखना होगा क्योकि न्यायालय की अवमानना आपसे भी अनजाने में हो सकती है

न्यायालय की अवमानना के दोषी शिद्ध हुए प्रशान्त भूषण हुवा एक रुपया का जुर्माना  तो समझिये क्या होती है न्यायालय की अवमानना  न्यायालय की अवमान...